आरोहणम्: स रि₁ म₁ प ध₁ स̇ अवरोहणम् - स̇ ध₁ प म₁ ग₃ रि₁स
ताल विधिः - I₃ I₃ 0 0 (Total 10 beat)
परिचरणम् Service
पल्लवी
|| स रि म ग रि ; | स रि ध प म ; | स रि स ध | प म ग रि ||
उ प च र णम् प रि च र णम् गु रु ज न स वि धे
|| स ध प ध म प | रि म प ध स̇ ; | रि̇ स̇ ध प | म ग रि स ||
अ नु दि न म पि क र णी यम् सु मु दि त म न सा
|| स रि म ग रि ; | स रि ध प म ; | स रि स̇ ध | प म ग रि ||
उ प च र णम् प रि च र णम् गु रु ज न स वि धे
अनुपल्लवि
|| स̇ ; ध म प ध | स̇ प ध रि̇ ; | प ध स̇ रि̇ | म̇ ग̇ रि̇ ; || ||
श्री गु रु प द वी प्र थि मा सु वि दि त ग रि मा
स̇ रि̇ म̇ ग̇ स̇ रि̇ | प ध रि̇ स̇ प ध | सरिमप धसरि̇म ग̇रि̇सध पमगरि || (||
स मि षि त सु ख| म वि र त सु ख| मिह तव भवतुच विभुपद महिमा
स रि म ग रि ; …)
चरणम् - मध्यमकालम्
सरिम गारिस ..| सरिम पाधप . . | सरिमप धसधप | मपधप मगरिस ||
नहि तु जामिता | विशतु मानसे | क्वचिदपि मलहर| गुरुपरि चरिते
सरिमागरि सरिपामग | सरिधापम रिमपधसा̇ |
अनुशोचन परिदेवन | परितापन कष्टगणम्
रि̇मसरि̇ धसपध मपरिप मगरिस ||
क्वचिदपि मलहर| गुरुपरि चरिते
सा सा रिम सरिमपधस | सा̇सा̇ रि̇मग̇रि̇ सधपध |
मा भू दपि परमरमण | मं ते वसदुप चिचरिषु
सा̇सा̇ रि̇सधप पा पा मगरिस||
शिष्य.. गुरुवर से वा धुरवह।।
|| रिमपधसा̇ रिमपधसा | मपधसा मपधसा̇ पध |
गुरुपदवीं गुरुपदवीं सुपदवीं सुपदवीं पद
सा̇ पध सा̇ धसा | , धसा̇ सा̇ स̇ || ( || स रि म ग रि ; …)
वीं पद वीं चिरं सुखं या सि
भावार्थः
उ प च र णम् प रि च र णम् गु रु ज न स वि धे
Devotion , Attendance in the Presence to Guru (Elders)
Shall be a
अ नु दि न म पि क र णी यम् सु मु दि त म न सा
Daily Duty with a Happy Mind.
अनुपल्लवि
By this,
श्री गु रु प द वी प्र थि मा सु वि दि त ग रि मा
Exalted Position of Guru, Renowned Greatness,
स मि षि त सु ख| म वि र त सु ख| मिह तव भवतुच विभुपद महिमा
Yearned Comforts, Incessant Happiness, may accrue to you, along with the Significance of Eternal Absolute (Brahman).
चरणम् - मध्यमकालम्
नहि तु जामिता | विशतु मानसे |
Never let the laziness/ boredom Enter your mind >>
क्वचिदपि मलहर| गुरुपरि चरिते
Nowhere in the Sin removing Guru Seva Program
अनुशोचन परिदेवन | परितापन कष्टगणम्
Sorrow, Complaints Grief - Such Difficulties
क्वचिदपि मलहर| गुरुपरि चरिते
Nowhere in the Sin removing Guru Seva Program
मा भू दपि
Should not Never occur.
परमरमण | मं ते वसदुप चिचरिषु
May Utmost Happiness Permeate Oh Shishya …
Who is intent on Guru Seva and
शिष्य.. गुरुवर से वा धुरवह।।
Who is assuming the responsibility of Service to Guru.
By this process, you are begetting
गुरुपदवीं गुरुपदवीं सुपदवीं सुपदवीं पद
Exalted status of Guru, which is very good,
वीं पद वीं चिरं सुखं या सि
Comfortably for ever.